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देहदान अभियान एक परिचय-

सामाजिक सेवा के क्षेत्र में विगत 30 वर्षों से कार्य कर रहे युग दधीचि देहदान अभियान के संस्थापक एवम संचालक जे0 के0 कॉलोनी जाजमऊ कानपुर निवासी मनोज सेंगर का देहदान अभियान इस वर्ष अपने बाईसवें वर्ष में है, इस अनूठे अभियान ने पूरे प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों में अध्ययन हेतु मानवदेह उपलब्ध कराने का ऐतिहासिक कार्य किया है, विज्ञान स्नातक 58 वर्षीय मनोज सेंगर ने अपनी पत्नी माधवी सेंगर के साथ आजीवन निःसंतान रहने का संकल्प कर अपना पूरा जीवन समाजहित समर्पित कर दिया है , उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों में सबसे महत्वपूर्ण रहा है देहदान अभियान, समाज की आस्था को आमूलचूल बदल डालने वाले इस अभियान का प्रारम्भ 15 नवंबर वर्ष 2003 में तत्कालीन राज्यपाल उत्तर प्रदेश आचार्य विष्णुकांत शास्त्री जी के आग्रह से हुआ समाज की आस्था को बदलते हुए मनोज वर्ष 2006 में प्रथम देहदान कानपुर देहात डेरापुर से 21 वर्षीय बउआ दीक्षत का कराने में सफल रहे, पूरे प्रदेश में देहदान अभियान चला रहे सेंगर दंपति अब तक 4000 से अधिक लोगो को देहदान हेतु संकल्पित कर चुके हैं साथ ही 318 मृत देह अब तक प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों को दान कराई जा चुकी हैं, कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, आगरा, अंबेडकर नगर, सैफई, अयोध्या, एम्स रायबरेली, एम्स गोरखपुर , कन्नौज, फतेहपुर, अकबरपुर, बदायूं, पीलीभीत, औरैया आदि मेडिकल कॉलेजों को शरीर समर्पित किए जा चुके हैं, अभियान के अंतर्गत 1500 से अधिक नेत्रहीन जनों को निशुल्क कॉर्निया प्रत्यारोपित कराई जा चुकी हैं, अकेले कानपुर नगर में ही 2700 लोग देहदान संकल्प कर चुके हैं,

क्यों आवश्यक है देहदान

मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेते ही प्रथम वर्ष के छात्रों को अपना अध्ययन मानव देह पर शोध करके ही प्रारंभ करना होता है बिना मृत देह जिसे चिकित्सकीय भाषा में केडबर कहते हैं की उपलब्धता के न तो प्रथम वर्ष की पढ़ाई हो सकती है और न निष्णात चिकित्सक ही तैयार हो सकते हैं इस कारण देहदान बहुत जरूरी है सरकार करोड़ों रुपए खर्च करके मेडिकल कॉलेज तो बनवा सकती है पर मानव देह उपलब्ध कराना उसके वश में नहीं है,

भारतीय समाज में किसी की मृत्यु होने पर उसका चितारोहण और अग्निदाह न हो यह कल्पना भी नहीं की जा सकती, समाज की इस आस्था से सीधे टकराने वाले और प्रचलित मान्यता को बिल्कुल विपरीत दिशा में मोड़ कर समाज की सोच को सकारात्मक परिणाम की ओर प्रेरित करना बड़ा ही कठिन काम था लेकिन सेंगर दंपति के बीस साल के अथक प्रयासों ने वह संभव कर दिखाया है जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी

कन्या भ्रूण हत्या के विरुद्ध एक युद्ध

“गर्भ में जिनको मार दिया है, उनके लिए लड़ेगा कौन, गूंज रही अब तक कानों में गूंगी चीख सुनेगा कौन। हृदय मिला है मानव का तो जागो फिर यह उत्तर दो,गर्भपात में मृत बच्चों का तर्पण कार्य करेगा कौन “।।

इस यक्ष प्रश्न को लेकर युग दधीचि देहदान अभियान प्रमुख मनोज सेंगर और माधवी सेंगर एक लंबे समय से अनूठा अभियान चला रहे हैं और वह है अजन्मी बेटियों के लिए महिलाओं द्वारा महा तर्पण,

वर्ष 2011 से महिला सशक्तिकरण के लिए अनवरत संचालित इस अद्भुत कार्यक्रम में नगर की प्रतिष्ठित महिलाए पितृ पक्ष में एक निर्धारित दिन गंगा किनारे स्थित सरसैया घाट पर एकत्र होकर विधिवत उन बेटियों के लिए तर्पण और पिंडदान करतीं हैं जिन्हें पुत्र मोह के कारण समाज ने धरती पर आने ही नहीं दिया,

कार्यक्रम संयोजक मनोज सेंगर बताते हैं कि वर्ष 2010 के नवंबर माह में जे के कॉलोनी जाजमऊ में आयोजित विराट गायत्री महायज्ञ में एक हजार लोगों को हमने सामूहिक कन्या भ्रूण हत्या रोकने की शपथ दिलाई थी, उसी समय एक महिला रोते हुए आई और बड़े संकोच से बताया कि उसने दो बार गर्भपात कराया है और उन गर्भ में मार दी गई बेटियों के लिए कोई पूजा पाठ भी नहीं करा सकी क्या शास्त्रों में कोई विधान है कि उन अजन्मी बच्चियों को मोक्ष मिल सके,

मनोज सेंगर बताते हैं कि इस प्रश्न ने उनकी आत्मा को झकझोर दिया, रात भर सो नहीं सके, इसी के बाद जब आचार्य श्री राम शर्मा जी द्वारा लिखित कर्मकांड भास्कर पुस्तक का अध्ययन किया तो एक पूरा मंत्र मिला जो गर्भपात में मृत बच्चों के पिंडदान का आदेश है,

उस समय तक मान्यता थी कि महिलाए तर्पण नहीं करतीं लेकिन उसका भी प्रमाण मिला कि सीता जी ने स्वयं अपने ससुर दशरथ जी का पिंडदान गया जी में फल्गु नदी के तट पर किया था, बस तय कर लिया कि महिलाए ही अजन्मी बेटियों के लिए तर्पण करेंगी,

मूढ मान्यताएं तोड़ने का अपना स्वभाव है इस लिए बिना किसी डर के सार्वजनिक रूप से नगर की प्रमुख महिलाओं को इस कार्य में भाग लेने हेतु आवाहन किया और आश्चर्य जनक रूप से नगर की बेटियों ने उत्साह से इस अनूठे आयोजन में भाग लिया,

वर्ष 2011 से अनवरत प्रत्येक पितृ पक्ष में यह आयोजन किया जाता है, केवल कोरोना के कारण वर्ष 2020 में एक साल को छोड़ दें तो यह आयोजन अनवरत पितृपक्ष में मां गंगा के तट पर कानपुर नगर के हृदय स्थल सरसैया घाट पर संपन्न किया जाता है, आदरणीय सदा स्मृतिवान डॉ बद्रीनारायण तिवारी, पंडित के ए दुबे पद्मेश, पंडित शेषनारायण त्रिवेदी, पंडित विजय पांडेय, माननीय सांसद देवेंद्र सिंह भोले जी , विधासभा अध्यक्ष श्री सतीश माहना जी सहित नगर के अनेक गणमान्य जन इस अदभुत आयोजन के साक्षी बन चुके हैं,