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Frequently Asked Questions/ देह दान से संबंधित जानकारी

1. देहदान के लिए औपचारिक प्रक्रिया क्या है?

  • इच्छुक व्यक्ति को किसी मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज/युग दधीचि देह दान अभियान से संपर्क कर देहदान की सहमति-पत्र भरना होता है।
  • इसमें व्यक्ति अपनी मृत्यु के बाद शरीर दान करने की लिखित अनुमति देता है।

2. क्या इसके लिए रजिस्टर्ड संस्था या मेडिकल कॉलेज से संपर्क करना आवश्यक है?

  • हाँ, केवल मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज या रजिस्टर्ड संस्था ही देहदान स्वीकार करती है।
  • यह सुनिश्चित करता है कि शरीर का उपयोग वैध और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए हो।

3. देहदान की सहमति देने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज़ चाहिए?

  • सहमति-पत्र (Consent Form), शपथ पत्र
  • पहचान पत्र (आधार, पैन, वोटर आईडी आदि)
  • गवाहों के हस्ताक्षर भी आवश्यक होते हैं।

4. मृत्यु के बाद देहदान की सूचना किसे और कैसे दी जाती है?

  • मृतक के परिजन युग दधीचि देह दान अभियान को तुरंत सूचना देते हैं। नेत्र दान मृत्यु के 06 घंटे के भीतर और देह दान मृत्यु के 12 घंटे के भीतर ही किए जा सकते है।
  • संस्था की टीम शव को लेने के लिए आती है।

5. देहदान का उपयोग किस प्रकार किया जाता है—शिक्षण, अनुसंधान या अंग प्रत्यारोपण?

  • मुख्यतः शिक्षण और अनुसंधान के लिए (एनाटॉमी, सर्जरी प्रशिक्षण)।
  • अंगदान अलग प्रक्रिया है, जिसमें अंग जीवित रोगियों को प्रत्यारोपित किए जाते हैं।

6. क्या हर व्यक्ति का शरीर देहदान के लिए स्वीकार किया जाता है?

  • नहीं, कुछ चिकित्सकीय परिस्थितियों में शरीर स्वीकार नहीं किया जाता।

7. किन परिस्थितियों में देहदान अस्वीकार किया जा सकता है?

  • संक्रामक रोग (HIV, Hepatitis, TB आदि)
  • केवल प्राकृतिक मृत्यु की स्थिति मे ही देह दान स्वीकार होता है।
  • मृत्यु के बाद लंबे समय तक शव सुरक्षित न रह पाने की स्थिति मे।

8. देहदान और अंगदान में क्या अंतर है?

  • देहदान: मृत्यु के बाद पूरा शरीर मेडिकल शिक्षा/अनुसंधान हेतु दिया जाता है।
  • अंगदान: मृत्यु या जीवनकाल में अंग (जैसे हृदय, गुर्दा, कॉर्निया) प्रत्यारोपण हेतु दान किए जाते हैं।

9. क्या देहदान से अंतिम संस्कार की परंपराओं पर असर पड़ता है?

  • हाँ, पारंपरिक दाह-संस्कार या दफ़न की जगह शरीर संस्था को सौंपा जाता है।
  • परिवार चाहे तो बाद में प्रतीकात्मक श्रद्धांजलि/अनुष्ठान कर सकता है।

10. परिवार और समाज की भावनाओं को कैसे संतुलित किया जाए?

  • परिवार को समझाना कि यह समाज और विज्ञान के लिए अमूल्य योगदान है।
  • धार्मिक/सांस्कृतिक दृष्टिकोण से इसे पुण्य कार्य के रूप में प्रस्तुत करना।

11. देहदान करने का निर्णय लेने से पहले किन बातों पर विचार करना चाहिए?

  • परिवार की सहमति
  • धार्मिक/सांस्कृतिक मान्यताएँ
  • संस्था की विश्वसनीयता और प्रक्रिया की स्पष्टता

12. क्या देहदान करने वाले व्यक्ति को कोई प्रमाणपत्र या सम्मान दिया जाता है?

  • हाँ देहदान की सहमति पर संस्था युग दधीचि देह दान अभियान प्रमाणपत्र देती हैं।
  • मृत्यु के बाद परिवार को सम्मान-पत्र या सार्वजनिक श्रद्धांजलि दी जाती है।

13. परिवार को इस निर्णय के बारे में कैसे समझाया जाए?

  • उन्हें बताना कि यह समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए योगदान है।
  • यह कार्य मृत्यु के बाद भी जीवन को सार्थक बनाता है।

14. देहदान से समाज को क्या लाभ होता है?

  • मेडिकल छात्रों को वास्तविक शरीर पर अध्ययन का अवसर मिलता है।
  • मेडिकल छात्रों को वास्तविक शरीर पर अध्ययन का अवसर मिलता है।
  • नई सर्जरी तकनीक और अनुसंधान संभव होते हैं।
  • यह चिकित्सा विज्ञान की प्रगति और मानवता की सेवा है।

प्रश्न: मृत्यु की स्थिति में क्या किया जाना चाहिए?

उत्तर: यदि मृत्यु घर पर होती है, तो आपको उपचाररत/परिवार के चिकित्सक को बुलाना होगा ताकि वे मृत्यु की पुष्टि कर सकें, प्रमाणित कर सकें और प्रमाणपत्र जारी कर सकें।

प्रश्न: मृत शरीर/अंग किसे प्राप्त होते हैं?

उत्तर: युग दधीचि देह दान अभियान अपने स्वयंसेवकों के माध्यम से शरीर/अंग दान की औपचारिकताओं को सम्पन्न करता है और शव को पूर्ण सम्मान के साथ एम्बुलेंस द्वारा मेडिकल कॉलेज/प्रतिरोपण केन्द्र तक पहुँचाया जाता है।

प्रश्न: परिवार को नगर निगम से मृत्यु प्रमाणपत्र कैसे प्राप्त होता है?

उत्तर: प्राप्तकर्ता प्राधिकरण (मेडिकल कॉलेज) द्वारा जारी दान प्रमाणपत्र के आधार पर नगर निगम मृत्यु का पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करता है।

प्रश्न: जीवन का उपहार (Gift of Life) क्या है?

उत्तर: जब किसी व्यक्ति का कोई अंग (जैसे गुर्दा) या ऊतक (जैसे हड्डी या त्वचा) काम करना बंद कर देता है, तो किसी अन्य व्यक्ति का अंग या ऊतक लगाया जा सकता है। आधुनिक शल्य-चिकित्सा और दवाइयों की मदद से वह अंग/ऊतक फिर से कार्य करने लगता है। यही है जीवन का उपहार — जब कोई व्यक्ति अपनी मृत्यु के बाद अपने अंग दान करता है और किसी दूसरे को नया जीवन मिलता है। इसे प्रत्यारोपण (Transplantation) कहा जाता है।

प्रश्न: अंगदान क्या है?

उत्तर: अंगदान का मतलब है कि कोई व्यक्ति अपने जीवनकाल में यह संकल्प लेता है कि मृत्यु के बाद उसके शरीर से अंग निकालकर उन्हें उन रोगियों को दिया जा सके जिनके अंग काम करना बंद कर चुके हैं। इस तरह अंगदान से किसी गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को नया जीवन मिल सकता है। यही है जीवन का उपहार।

प्रश्न: कौन-कौन से अंग और ऊतक दान किए जा सकते हैं?

उत्तर: प्रमुख दाता अंग और ऊतक हैं — हृदय, फेफड़े, यकृत, अग्न्याशय, गुर्दे, नेत्र, हृदय वाल्व, त्वचा, अस्थियाँ, अस्थि मज्जा, संयोजी ऊतक, मध्य कान, रक्त वाहिकाएँ। इस प्रकार एक दाता अनेक गंभीर रूप से बीमार रोगियों को जीवन का उपहार दे सकता है, जो अन्यथा जीवित नहीं रह पाते।

प्रश्न: मस्तिष्क मृत्यु (Brain Death) क्या है?

उत्तर: यह मस्तिष्क की सभी क्रियाओं का अपरिवर्तनीय और स्थायी रूप से बंद हो जाना है। ऐसे व्यक्तियों को कृत्रिम सहारे (वेंटिलेशन) पर रखा जाता है ताकि अंगों में ऑक्सीजन की आपूर्ति बनी रहे और वे स्वस्थ स्थिति में तब तक रहें जब तक उन्हें निकाला न जाए। अधिकांश मस्तिष्क मृत्यु के मामले सिर की चोटों, मस्तिष्क ट्यूमर या गहन चिकित्सा इकाई (ICU) के रोगियों में होते हैं। ऐसे रोगियों के अंग अंग-विफलता से पीड़ित रोगियों में प्रत्यारोपित किए जा सकते हैं और उन्हें नया जीवन दिया जा सकता है।

प्रश्न: मस्तिष्क मृत्यु का निदान कैसे किया जाता है?

उत्तर: यह कार्य स्वतंत्र रूप से चिकित्सकों की एक टीम द्वारा किया जाता है, जिनकी योग्यता और अनुभव को अस्पताल इस उद्देश्य के लिए मान्यता देता है। चिकित्सक परीक्षणों का एक सेट करते हैं ताकि मस्तिष्क मृत्यु की पुष्टि हो सके।

प्रश्न: अंग कितनी शीघ्रता से दान किए जाने चाहिए?

उत्तर: स्वस्थ अंगों का प्रत्यारोपण दाता की मस्तिष्क मृत्यु के बाद यथाशीघ्र प्राप्तकर्ता को कर देना चाहिए।

प्रश्न: दाता कौन हो सकता है?

उत्तर: कोई भी व्यक्ति, चाहे उसकी आयु, जाति या लिंग कुछ भी हो, अंग और ऊतक दाता बन सकता है। यदि उसकी आयु 18 वर्ष से कम है, तो माता-पिता या विधिक अभिभावक की सहमति आवश्यक है। अंगदान की चिकित्सीय उपयुक्तता मृत्यु के समय निर्धारित की जाती है।

प्रश्न: मस्तिष्क मृत्यु के बाद अंगदान की सहमति कौन दे सकता है?

उत्तर: यदि मृत्यु से पहले कोई सहमति या दाता प्रतिज्ञा पत्र भरा नहीं गया है, तो अंगदान की सहमति देने का अधिकार उस व्यक्ति के पास होता है जो विधिक रूप से मृत शरीर के कब्जे में है।