
जनसभाओं और सेमिनारों में स्थानीय स्तर पर लोगों को अंगदान और देहदान का महत्व समझाया जाता है। समाचार पत्रों और टीवी चैनलों के जरिए संदेश फैलाया जाता है। देहदान करने वाले परिवारों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित कर समाज में प्रेरणा दी जाती है। मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रों को वास्तविक अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराकर उन्हें भी अभियान से जोड़ा जाता है।
मेडिकल छात्रों को वास्तविक शरीर पर अध्ययन का अवसर मिलता है, जिससे डॉक्टरों की नई पीढ़ी बेहतर प्रशिक्षित होती है। अंगदान और नेत्रदान से मरीजों को नया जीवन और दृष्टि मिलती है। लोग इसे धर्म और समाज सेवा मानकर आगे आ रहे हैं, जिससे सामाजिक एकता और सहयोग बढ़ रहा है। पहले देहदान को संकोच से देखा जाता था, अब इसे सम्मान और प्रेरणा का कार्य माना जा रहा है।